परिकल्पना ब्लॉग उत्सव को प्रायोजक मिला परिकल्पना ब्लॉग उत्सव को प्रायोजक मिला

कहा जाता है कि यदि चाहत सबल हो तो लक्ष्य मुश्किल नहीं होता । जब मैंने परिकल्पना ब्लॉग उत्सव की उद्घोषणा की थी तब शायद मुझे भी यकीन नहीं था ...

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10:06 am

परिकल्पना ब्लॉग उत्सव-2010 की उद्घोषणा परिकल्पना ब्लॉग उत्सव-2010 की उद्घोषणा

जैसा कि पिछले पोस्ट में मैंने ब्लॉग उत्सव की परिकल्पना करते हुए आपके सुझाव और रचनात्मक सहयोग की अपेक्षा की थी । अपेक्षा से कहीं ज्यादा आपक...

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2:27 pm

ब्लॉग उत्सव-2010 की परिकल्पना ब्लॉग उत्सव-2010 की परिकल्पना

हमारे लिए प्रत्येक दिन किसी-न-किसी रूप में उत्सव का दिन होता है । उत्सव का यह रंग हमारी परंपराओं और रीति-रिवाजों को कायम रखने, आपस में लोगों...

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12:15 pm

मातमी धुन पर थिरकती हुई खुशी तलाश करो ! मातमी धुन पर थिरकती हुई खुशी तलाश करो !

ग़ज़ल हो गयी नंगी व्यवस्था , सादगी तलाश करो ! पत्थरों के शहर में एक आदमी तलाश करो !! पर्यावरण के नाम पर कर दिए लाखों खरच- खो गयी...

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10:15 am

आप ऐसे थे नहीं बेवक्त कैसे हो गए ? आप ऐसे थे नहीं बेवक्त कैसे हो गए ?

बहुत दिनों के बाद मेरे जेहन की कोख से फूटी है एक ग़ज़ल, पढ़ना चाहेंगे आप ? ग़ज़ल बिन पिए शराब यूं मदमस्त कैसे हो गए ? आप ऐसे थे नही...

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10:12 am

आपके लिए सृजनशीलता क्या मायने रखती है ? आपके लिए सृजनशीलता क्या मायने रखती है ?

अभी पिछले दिनों मैंने परिकल्पना पर बसंतोत्सव का आयोजन किया । एक महीने तक कालजयी रचनाकारों के साथ-साथ आप सभी ने आज के कवियों की फागुनी रचनाएँ...

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6:55 pm
 
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